Total Pageviews

Saturday, 10 October 2015

लघु कथाएँ

लघु कथाएँ
१ 
क आदमी को महसूस कि भगवान उसके पास आ रहे हैं और उनके हाथ में एक सूट केस है !
भगवान ने कहा --पुत्र मेरे साथ चलो। आदमी ने जबाव दिया -अभी इतनी जल्दी अभी तो मुझे बहुत काम करने हैं। आपके इस सूट केस में क्या है? भगवान ने कहा -- तुम्हारा सामान ! क्या इसमें  मेरा धन !भगवान ने  कहा -नहीं, हैं। आदमी ने पूछा -- मेरी यादें ?  मेरी बुद्धिमत्ता ?  मेरा परिवार और मित्र हैं ? मेरा शरीर ? मेरी आत्मा ?
भगवान ने जबाव दिया -- इनमें से कोई भी नहीं।
आदमी की आँखें छल-छाला पड़ी। उसने कहा -- मेरे पास कभी भी कुछ नहीं था !
भगवान ने जबाव दिया -- यही सत्य है प्रत्येक क्षण जो तुमने जिया, वही तुम्हारा था, वे ही क्षण तुम्हारे हैं।  जो भी इस समय आपके पास है, उसे भरपूर जियें, आज में जियें ,अपनी जिंदगी जिए,खुश होना कभी न भूलें, यही एक बात महत्त्व रखती है !


एक बच्चा अपनी माँ के साथ एक दुकान पर गया। दुकानदार ने उसकी मासूमियत देखकर उसको सारी टॉफी  का डिब्बा खोलकर कहा-: “लो चाहे जितनी टॉफियाँ ले लो…!!!" पर उस बच्चे ने उन्हें मना करदिया. दुकानदार और उसकीमाँ ने उसे बहुत कहा पर वो मना करता रहा। तब उस दुकानदार ने खुद अपने हाथ से टॉफियाँ निकाल कर उसको दीं तो बच्चे ने ले लीं।
वापस आते हुऐ उसकी माँ ने पूछा कि ”जबअंकलतुम्हारे सामने डिब्बा खोल कर टाँफी दे रहे थे , तबतुमने नही ली और जब उन्होंने अपने हाथों से दीं तोले ली..!!ऐसा क्यों..??”तब उस बच्चे ने बहुत खूबसूरत प्यारा जवाब दिया-: “माँ मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं… अगर मैं टॉफियाँलेता तो दो तीन टाँफियाँ ही आती जबकि अंकल केहाथ बड़े हैं इसलिये ज्यादा टॉफियाँ मिलगईं….!!!!!”बिल्कुल इसी तरह जब भगवान हमें देता है तो वोअपनी मर्जी से देता है और वो हमारी सोच से परेहोता है,हमें हमेशा उसकी मर्जी में खुश रहनाचाहिये….!!!क्या पता..?? वो किसी दिन हमें पूरा समंदर देनाचाहता हो और हम हाथ में चम्मच लेकर खड़े हों…

No comments:

Post a Comment